Thursday, 16 August 2018

"अटल" तेरे जीवन को नमन




"मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं,
लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?"


"अटल" एक नाम  मात्र नहीं बल्कि एक जज्बा है जो की न जाने कितनो को सबल और ताकतवर बनाता आया है। अटल बिहारी वाजपेयी तब बेबाक फैसला लिया करते थे जब उनके पास साझा सरकार थी।

"बाधायें  आती हैं तो आयें
घिरे प्रलय की घोर घटाएं
पावों के नीचे अंगारे
सर पर बरसे ज्वालाएं
निज हाथो में हँसते हँसते
आग लगा कर चलना होगा
कदम मिला कर चलना होगा "

अटल एक प्रेरणा हैं उनके लिए जो काम में विश्वास रखते हैं न की भोकाल में । आज के नेता क्या जानेगे उस अटल को जिन्होंने अपने विपक्षियों को भी सुना है।

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ ही भारतीय राजनीति का सतयुग समाप्त हुआ । उनकी कविताएँ हमेशा उनको जिन्दा रखेंगी।

Thursday, 28 January 2016

"मोदी को इस्तीफा देना होगा"

सुबह हीं फोन बज रहा था.... देखा तो कोई unknown. नम्बर लिख रहा था फोन पर.....

उधर से मोदी जी की आवाज सुनाई दी बहुत व्यथित थे...
कह रहे थे.........का करे? इस्तीफा दे दें?...
इ सब HCU में संस्थागत रुप से मार डाला एक छात्र को... हमको बहुत आत्मग्लानि हो रहा है......

हम बोले:........ देखिये मोदी साहब.... सब आपकी ही गलती है। आप मान नहीं रहे थे अब तो आपको मानना हीं पड़ेगा। ना जाने इतने दिनों से कितने स्कॉलर लोग अपना अपना पुरस्कार वापस कर दिए हैं .........आपको तो तभी हीं इस्तीफा दे देना चाहिए था।
आपके आने के बाद विकास रुक गया है। चारों ओर भ्रष्टाचार और सामंतवाद का बोल बाला हो गया है। आपके आने से ब्राह्मणवाद बढ़ गया है (ब्राह्मणवाद शब्द का अर्थ, ----प्रगतिशील, नॉन कम्युनल कम्युनिस्ट पार्टी के ठेकेदारों से पता लगा सकते हैं, लेनिन' को लेनिन से ज्यादा जानने वाले और equility के समर्थक लेफ्टिस्ट पत्रकार आपको अच्छा से समझा सकते हैं..... शब्दकोश में मिलने की सम्भावना कम हीं है )

हम बोले की देखिये अभी भी समय है देर आये दुरुस्त आये। अब आप विदेश में घूम घूम के योग में  जो "सेल्फीआसन" को समाहित करना चाह रहे हैं उसको बंद कीजिये और संसद में कुछ क़ानून पास कीजिये। ये मौजूदा विश्वविद्यालयों में बढ़ रहे सामन्तवाद और ब्राह्मणवाद को कम करने में सहायक होगा। मेरे कुछ पॉइंट्स हैं उनको संसद में पास कराइए क़ानून बना के
  1. विश्वविद्यालयों में सामन्तवादी छात्रों को students न कह कर "नीच सवर्ण"  को  उनके नाम के पूर्वार्ध में जोड़ा जाये ताकि प्रगतिशील छात्रो को उनकी dignity मिल सके।
  2. प्रगतिशील और नॉन कम्युनल छात्रों को इन "नीच सवर्णों" को ठीक  करने के लिए कभी भी हॉस्टल में घुस कर मार-पीट करने की इज़ाज़त दी जाए।
  3. क़ानून का कोई भी कोर्ट इन प्रगतिशील छात्रों पर कोई भी कार्यवाई नहीं कर सकता है सिर्फ और सिर्फ संसद हीं कार्यवाही कर सकती है वो भी तब जब 3/4 सांसद समर्थन में हो।
  4. इससे प्रगतिशील विचारधारा वाले छात्रो को कैंपस में dignity की लड़ाई लड़ने में सहायता प्राप्त होगी और उनको मार-पीट करने के बाद रोहित वेमुला की तरह कायरों वाला कदम नहीं उठाना पड़ेगा।
इस सब के बाद आप Primetime में #रब्बिश कुमार को अपना जात बताते हुए सब से क्षमा मांग कर त्याग पत्र देते हुए RSS में चले जाइये वही पे आपको अपने गलतियों का पश्चाताप होगा।
देखिये मोदी जी क्या करते हैं ??

नहीं मानते हैं तो हम आजम खान जी के साथ मिल के UN के सचिव बान की मून जी बात करेंगे.....और शिकायत करेंगे उनका ....


बाकी जो है सो हईये है....

Sunday, 27 September 2015

एक थी “सुधा”

कुछ दिन पहले एक अखबार में कहीं दिखा LIFE OK पर एक सीरियल आने वाला है, ‘एक थी सुधा, एक था चंदर’. पता नहीं क्यों पर जब भी सुधा सुनता हूँ तो एक ही ध्यान आता है. “धर्मवीर भारती” की सुधा, उनके  “गुनाहों का देवता” की. ऐसा नहीं की इससे पहले कभी “सुधा” नहीं सुना पर ये सुधा तो एक कल्पना है जिसको feel ही किया जा सकता है. रात को अचानक से नींद टूटी तो फिर मन किया की देखे इस LIFE OK की सुधा को, रात को हीं कोई एप्लीकेशन था डाउनलोड किया और देखा पर वो सुधा नहीं दिखी जो “गुनाहों का देवता” के धर्मवीर भारती की थी, ये तो कोई और है जो नाटक कर रही है, आज कल के डायरेक्टर और एक्टर  केवल आज कल के राइटर की ही भावना को दिखा सकते हैं उनके इस नाटक में वो उन्सियत नहीं आयेगी जो सुधा और चंदर के बीच में थी. जिसको सिर्फ और सिर्फ उस किताब को पढ़ के feel कर सकते हैं. यहाँ तो अजीब सा नाटक लगता है इसको देख कर गुस्सा भी आता है.
कभी किसी कहानी को अपने से नहीं बदलना चाहिए उसमे अपनी कोई अलग से भावना नहीं डालनी चाहिए नहीं तो उसकी सुधा बदल जाती है, नहीं नहीं मर जाती है.
सुधा, चंदर, बिनती, पम्मी सब अचानक से याद आने लगे : -
आज से करीब 10 साल पहले एक किताब उठाई थी ‘जवाहर नवोदय विद्यालय’ “सिवान” की लाइब्रेरी से, नाम ही कुछ अजीब सा लगा “गुनाहों का देवता”, भला कोई गुनाह कर के देवता कैसे बन जाता है? ये मेरे जीवन की पहली किताब थी इससे पहले कभी भी हिंदी लिटरेचर को नहीं पढ़ा था. सच कहूं तो जिस दिन लिया और  जिस पल से पढना शुरू किया उसके बाद रुका नहीं 14 घंटे तक लगातार पढता रहा. बीच में खाना पीना सब कुछ छुट गया.
चंदर तो सुधा के लिए देवता हीं था और उसने तो केवल गुनाह ही किया सुधा के लिए
वो सुधा ही थी जो चंदर के चरित्र को बांधे हुए थी, सुधा को उसके गुनाहों की सजा क्यों मिली?
 “कैफ बरदोस बादलों को यूं न देख
बेखबर तू न कुचल जाये कहीं”   गेसू ने सुधा को कहा था और वाकई सुधा कुचल ही जाती है नियति के हाथों  
“या मुरली मुरलीधर की अधरा न धरी अधरा न धरौंगी” ये बिनती ने बोला था सुधा को चिढाते हुए.
सुधा का चंदर के मैडल को अपने वक्ष पे लगा कर उसको चूम लेना और चंदर का मौका न चूकना ये कह के ‘बस कर दिया न गन्दा उसे’  
सुधा की शादी से लेकर उसके मरने तक और चंदर का सुधा की हीं छोटी बहन बिनती के माथे पे राख लगा शादी करना
सब कुछ याद आने लगा अचानक से, 10 साल से उपर हो गये हैं पर ऐसा लगता है की कल ही की बात है. 
फिर से पढने का दिल करता है पर अब नहीं हिम्मत होती है, बिनती के उस टीचर का हाल हो गया है जो कविता को पढने के साथ साथ उसमे खो जाता है व्यथित हो के इधर-उधर टहलने लगता है. मुझे भी मन करता है की कहानी में घुस के सब कुछ बदल दूं. 

Saturday, 30 August 2014

कॉमेडी पॉलिटिक्स वीथ "आप"

कल दोपहर को हमारे पास मोदी जी का फ़ोन आया था। कह रहे थे की उनको जापान जाना है और उनसे देश में अच्छे दिन आ नहीं रहे हैं वो बहुत हीं दुखी थे बोले की अब बीजेपी में आ कर देश को बचा लीजिये सभी ओर चोर हीं चोर हैं जब तक देश से भ्रस्टाचार ख़त्म नहीं हो जाता तब तक के लिए देश में प्रधानमंत्री बन कर देश को संभाल ले,  हमने मना कर दिया " आप " का अपना एक उसूल है एक आदर्श है हम जिसके खिलाफ चुनाव लड़ते हैं उससे नहीं मिलते हैं, सिर्फ केजरी भैया हीं इसको तोड़ सकते हैं, उनको मन किया तो कांग्रेस से मिल कर सरकार बनाये थे, अगर उनको मन करेगा तभी हम पीएम की कुर्सी लेंगे।

 पर आज तो ओबामा जी फ़ोन कर के हमको बोल रहे हैं की सारे यूएसए  को हमारी जरुरत है वो अपना ओवल ऑफिस को हमको दे रहे हैं कह रहे हैं की अब अमेरिका में भी "आप" का अलख जगाना है यहाँ पर कोई धरना नहीं देता सभी बिजी हैं किसी को भ्रस्टाचार का ध्यान हीं नहीं, सब झाड़ू तक नहीं रखते, लगाना तो दूर की बात है भ्रस्टाचार का इबोला उन्हें  बहुत परेशान कर रहा है हम ने मन हीं मन में सोचा की नहीं ओवल ऑफिस में चले गए तो अपने देश में का भ्रस्टाचार कैसे ख़तम हो पायेगा एक "आप" हीं तो है जो बचा सकती है देश को, रास्ट्र में न जाने कैसी लहर चल गयी है कोई नहीं जी हम नहीं जायेंगे अमेरिका

पर अभी ये लिखने से पहले हमारे पास यूनाइटेड नेशन से फ़ोन आ गया है की हमको यूनाइटेड नेशन का सचिव बनाया जा रहा है जिनेवा में हमरे लिए सेक्रेटरी जनरल का कुर्सी बान की मून साहब हाथ में धर के खड़े हैं। हमरे कंधो पर विश्व की जिम्मेदारी है हमको अब इस विश्व से भ्रस्टाचारी इबोला को झाड़ू लगाना है

देखिये हम फ़ोन पर बात किये हैं रिकॉर्ड नहीं किये हैं इ सब बात पर हम "आप" का एक ईमानदार सिपाही हैं  इसलिए आपसे कभी कुछ छुपा नहीं सकते, जब से हमने आम आदमी पार्टी ज्वाइन किया है हमारे पास कई ऑफर आ रहे थे पर हम लोग जनता से बिना पूछे कोई काम थोड़े करते हैं।

जैसा की केजरी भैया बोलते हैं की किसी काम करने से पहले जनता से जरुर पूछ लेना, सो हम पूछ रहे हैं, हमको कुमार भैया जैसा गीत गाना नहीं आता है और हम मीडिया में नहीं जाते इसलिए आप सभी से आग्रह है प्लीज हमको इस ब्लॉग पर लिख कर बताइए की हमको क्या करना चाहिए?

सचिव का पोस्ट है ध्यान में रखियेगा
का करें ?चले जाए यूनाइटेड नेशन ?


आपका "आप" का एक सिपाही 
आशुतोष कुमार पाण्डेय 


Tuesday, 17 June 2014

चिंटू- पिंटू आ मिडिया वाला सब बदमाश

दो लड़के थे चिंटू आ पिंटू,
 अडोस-पड़ोस में रहते थे,
 बड़ा मेहनत करते थे
 अपने  सब दोस्त का ख्याल रखते थे
किसी को भी नाराज नहीं होने देते थे

अचानक चिंटुआ पिंटूआ फेल होने लगा,
आ मिडिया वाला सब बदमाश खाली चिंटुआ से पूछे लगता है
काहे फेल हुआ जी ?
बताइए चिंटुआ का जवाब दे सकता है ?
पड़ोस में पिंटूआ भी तो फेल हुआ है,
अब चिंटुआ का बोलेगा --उ त ये हीं न बोलेगा की
उसका काहे नहीं दिखता है इ सब को
खाली चिंटुआ आ उसके पापा से पूछता है सब
बताइए पापा भी का कहेंगे नहीं कुछ तो उ अपना काम करेंगे आ झेंप के खाली हंसिये न सकते हैं ?

मिडिया वाला सब पहिले चिंटू के साथ पिंटू का भी फेल होना दिखाओ
फिर पूछना की काहे फेल हुआ चिंटू से ??

Monday, 16 June 2014

"लालू-नितीश " साथ साथ भाई!

लालू जी का सपोर्ट ले कर जदयू अपना काम निकाल रही है, वैसे कौन किसका काम निकाल रहा है ? लालू निकाल रहे हैं अपना काम की नितीश ? नितीश कुमार पता नहीं कौन सी रणनीति चला रहे हैं लेकिन कहीं से उचित नहीं लग रहा है आज भी बहूत सारे लोग बिहार में  नितीश कुमार को चाहते थे की वो स्टेट में काम करे पता नहीं काहें  झूठ-मूठ का दिल पे ले लिए हैं अब मोदी सरकार  में कुछ न कुछ तो है ही जो कठिन से "कठिन फैसला" करने का पीएम साहब सोचते रहते हैं
 कभी लालू का विरोध किये थे तभी न सी एम साहब बने थे आज उनका हीं सपोर्ट ले रहे हैं बी जे पी को पीछे करने के लिए?
सही बात है राजनीति में कुछ भी हो सकता है पर ये क्या साबित करेगा?
मोदी सरकार तो महंगाई को बढाने के लिए बम फोड़ने ही वाली है, बी जे पी का वोट अगले बिहार के सिंहासन के चुनाव तक इतना तो नहीं ही रहेगा, बशर्ते मोदी जी कोई  "अच्छे दिन आने वाले हैं" का जादुई शो बिहार में भी न चला दें,  और नितीश कुमार लगता है की अपने तीर को झाडू न बना दें फाड़-फाड़ के, सब 'आप'स में ही नाराज हैं
इसमें सबसे ज्यादा मजा में तो लालू जी ही रहेंगे  ऐसा हवा लग रहा है

Sunday, 15 June 2014

मोदी सरकार-अर्थव्यवस्था- कठिन फ़ैसले

 प्रधानमंत्री मोदी जी का कहना है की देश की अर्थ व्यवस्था कमजोर है, इसको सही करने के लिए कठिन फैसले लेने की जरूरत है- कठिन शब्द को समझ पाना थोडा कठिन है यहाँ पे कठिन फैसले किसके लिए होंगे?
कठिन से मतलब क्या है? शायद सरकार अब अपनी सब्सिडी को ख़त्म करेगी, डीजल की कीमत बढ़ेगी, रेल किराया बढेगा  महंगाई का बढ़ना तो लाजमी है।
वास्तव में मोदी जी देश के सभी मिडिल क्लास के लोगों को एक पूर्व सुचना दे रहे हैं की कठिन फैसले लेंगे वो, ये तो बस मध्य वर्ग और निम्न वर्ग(यहाँ वर्ग से मतलब आर्थिक स्थिति से है) के लिए कठिन फैसले होंगे।
सरकार के इस कठिन फैसले से देश के सरकारी खजाने में बढ़ोतरी होगी। जिसको मोदी जी देश की प्रगति में खर्च करेंगे। पर इससे पहले देश के लोअर मिडिल और लोअर क्लास को क्या स्थिति होने वाली है इसका पहले ही अनुमान लगा लेना पड़ेगा।
महंगाई को रोकने का काम मोदी सरकार कैसे करेगी? --अच्छे दिन आने वाले हैं, की जाने वाले हैं ?