प्रधानमंत्री मोदी जी का कहना है की देश की अर्थ व्यवस्था कमजोर है, इसको सही करने के लिए कठिन फैसले लेने की जरूरत है- कठिन शब्द को समझ पाना थोडा कठिन है यहाँ पे कठिन फैसले किसके लिए होंगे?
कठिन से मतलब क्या है? शायद सरकार अब अपनी सब्सिडी को ख़त्म करेगी, डीजल की कीमत बढ़ेगी, रेल किराया बढेगा महंगाई का बढ़ना तो लाजमी है।
वास्तव में मोदी जी देश के सभी मिडिल क्लास के लोगों को एक पूर्व सुचना दे रहे हैं की कठिन फैसले लेंगे वो, ये तो बस मध्य वर्ग और निम्न वर्ग(यहाँ वर्ग से मतलब आर्थिक स्थिति से है) के लिए कठिन फैसले होंगे।
सरकार के इस कठिन फैसले से देश के सरकारी खजाने में बढ़ोतरी होगी। जिसको मोदी जी देश की प्रगति में खर्च करेंगे। पर इससे पहले देश के लोअर मिडिल और लोअर क्लास को क्या स्थिति होने वाली है इसका पहले ही अनुमान लगा लेना पड़ेगा।
महंगाई को रोकने का काम मोदी सरकार कैसे करेगी? --अच्छे दिन आने वाले हैं, की जाने वाले हैं ?
कठिन से मतलब क्या है? शायद सरकार अब अपनी सब्सिडी को ख़त्म करेगी, डीजल की कीमत बढ़ेगी, रेल किराया बढेगा महंगाई का बढ़ना तो लाजमी है।
वास्तव में मोदी जी देश के सभी मिडिल क्लास के लोगों को एक पूर्व सुचना दे रहे हैं की कठिन फैसले लेंगे वो, ये तो बस मध्य वर्ग और निम्न वर्ग(यहाँ वर्ग से मतलब आर्थिक स्थिति से है) के लिए कठिन फैसले होंगे।
सरकार के इस कठिन फैसले से देश के सरकारी खजाने में बढ़ोतरी होगी। जिसको मोदी जी देश की प्रगति में खर्च करेंगे। पर इससे पहले देश के लोअर मिडिल और लोअर क्लास को क्या स्थिति होने वाली है इसका पहले ही अनुमान लगा लेना पड़ेगा।
महंगाई को रोकने का काम मोदी सरकार कैसे करेगी? --अच्छे दिन आने वाले हैं, की जाने वाले हैं ?
oooo ! Exactly
ReplyDeleteआपके शब्दो के चयन से यह लगता है कि शुरुआती दौर में आपके विचार आज के विचारों का उलट था। खैर, यह एक मानव स्वभाव है। आप कभी जे.एन. यू. से भी प्रभावित रहे हैं। वह कोई 3-4वर्ष पुरानी बात है, अतः विचारो में बदलाव की अपेक्षा त्वरित नही की जा सकती। परिवर्तन ही संसार का नियम है तोह यह भी जाहिर है कि आपके विचार फिर बदलेंगे। मोहभंग भी होगा , उचित समय का इंतजार करें।
ReplyDeleteमैं नहीं जानता की आप कौन हैं ? परन्तु मैं JNU से प्रभावित रहा हूँ ये २०१४ में असंभव है क्यूंकि मेरा JNU में जाना २०१५ में हुआ था और मेरे विचार में बदलाव कभी भी नहीं रहे हैं. मैं शुरू से ही ह्य्पोक्रेसी की आलोचना किया हूँ चाहे वो किसी का भी हो।
Deleteमैंने "२९ Aug २०१३ को मनमोहन जी के सरकार में हो रही रुपये की गिरावट को भी व्यंग देने की कोशिश की है और २०१४ में मोदी सरकार द्वारा कठिन फैसले लेने के कथन पर भी लोगों के ऊपर होने वाली बोझ को भी आलेखित किया है।
वैसे ये सोचने वाली विषय है की आपका कमेंट सिर्फ मोदी सरकार के ऊपर होने वाले पोस्ट आया है ? शायद आपके विचार प्रभावित और निष्पक्ष नहीं।
आशुतोष कुमार पाण्डेय