"मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं,
लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?"
"अटल" एक नाम मात्र नहीं बल्कि एक जज्बा है जो की न जाने कितनो को सबल और ताकतवर बनाता आया है। अटल बिहारी वाजपेयी तब बेबाक फैसला लिया करते थे जब उनके पास साझा सरकार थी।
"बाधायें आती हैं तो आयें
घिरे प्रलय की घोर घटाएं
पावों के नीचे अंगारे
सर पर बरसे ज्वालाएं
निज हाथो में हँसते हँसते
आग लगा कर चलना होगा
कदम मिला कर चलना होगा "
अटल एक प्रेरणा हैं उनके लिए जो काम में विश्वास रखते हैं न की भोकाल में । आज के नेता क्या जानेगे उस अटल को जिन्होंने अपने विपक्षियों को भी सुना है।
अटल बिहारी वाजपेयी के साथ ही भारतीय राजनीति का सतयुग समाप्त हुआ । उनकी कविताएँ हमेशा उनको जिन्दा रखेंगी।

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