सुबह हीं फोन बज रहा था.... देखा तो कोई unknown. नम्बर लिख रहा था फोन पर.....
उधर से मोदी जी की आवाज सुनाई दी बहुत व्यथित थे...
कह रहे थे.........का करे? इस्तीफा दे दें?...
इ सब HCU में संस्थागत रुप से मार डाला एक छात्र को... हमको बहुत आत्मग्लानि हो रहा है......
हम बोले:........ देखिये मोदी साहब.... सब आपकी ही गलती है। आप मान नहीं रहे थे अब तो आपको मानना हीं पड़ेगा। ना जाने इतने दिनों से कितने स्कॉलर लोग अपना अपना पुरस्कार वापस कर दिए हैं .........आपको तो तभी हीं इस्तीफा दे देना चाहिए था।
आपके आने के बाद विकास रुक गया है। चारों ओर भ्रष्टाचार और सामंतवाद का बोल बाला हो गया है। आपके आने से ब्राह्मणवाद बढ़ गया है (ब्राह्मणवाद शब्द का अर्थ, ----प्रगतिशील, नॉन कम्युनल कम्युनिस्ट पार्टी के ठेकेदारों से पता लगा सकते हैं, लेनिन' को लेनिन से ज्यादा जानने वाले और equility के समर्थक लेफ्टिस्ट पत्रकार आपको अच्छा से समझा सकते हैं..... शब्दकोश में मिलने की सम्भावना कम हीं है )
हम बोले की देखिये अभी भी समय है देर आये दुरुस्त आये। अब आप विदेश में घूम घूम के योग में जो "सेल्फीआसन" को समाहित करना चाह रहे हैं उसको बंद कीजिये और संसद में कुछ क़ानून पास कीजिये। ये मौजूदा विश्वविद्यालयों में बढ़ रहे सामन्तवाद और ब्राह्मणवाद को कम करने में सहायक होगा। मेरे कुछ पॉइंट्स हैं उनको संसद में पास कराइए क़ानून बना के
- विश्वविद्यालयों में सामन्तवादी छात्रों को students न कह कर "नीच सवर्ण" को उनके नाम के पूर्वार्ध में जोड़ा जाये ताकि प्रगतिशील छात्रो को उनकी dignity मिल सके।
- प्रगतिशील और नॉन कम्युनल छात्रों को इन "नीच सवर्णों" को ठीक करने के लिए कभी भी हॉस्टल में घुस कर मार-पीट करने की इज़ाज़त दी जाए।
- क़ानून का कोई भी कोर्ट इन प्रगतिशील छात्रों पर कोई भी कार्यवाई नहीं कर सकता है सिर्फ और सिर्फ संसद हीं कार्यवाही कर सकती है वो भी तब जब 3/4 सांसद समर्थन में हो।
- इससे प्रगतिशील विचारधारा वाले छात्रो को कैंपस में dignity की लड़ाई लड़ने में सहायता प्राप्त होगी और उनको मार-पीट करने के बाद रोहित वेमुला की तरह कायरों वाला कदम नहीं उठाना पड़ेगा।
देखिये मोदी जी क्या करते हैं ??
नहीं मानते हैं तो हम आजम खान जी के साथ मिल के UN के सचिव बान की मून जी बात करेंगे.....और शिकायत करेंगे उनका ....
बाकी जो है सो हईये है....

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