Saturday, 30 August 2014

कॉमेडी पॉलिटिक्स वीथ "आप"

कल दोपहर को हमारे पास मोदी जी का फ़ोन आया था। कह रहे थे की उनको जापान जाना है और उनसे देश में अच्छे दिन आ नहीं रहे हैं वो बहुत हीं दुखी थे बोले की अब बीजेपी में आ कर देश को बचा लीजिये सभी ओर चोर हीं चोर हैं जब तक देश से भ्रस्टाचार ख़त्म नहीं हो जाता तब तक के लिए देश में प्रधानमंत्री बन कर देश को संभाल ले,  हमने मना कर दिया " आप " का अपना एक उसूल है एक आदर्श है हम जिसके खिलाफ चुनाव लड़ते हैं उससे नहीं मिलते हैं, सिर्फ केजरी भैया हीं इसको तोड़ सकते हैं, उनको मन किया तो कांग्रेस से मिल कर सरकार बनाये थे, अगर उनको मन करेगा तभी हम पीएम की कुर्सी लेंगे।

 पर आज तो ओबामा जी फ़ोन कर के हमको बोल रहे हैं की सारे यूएसए  को हमारी जरुरत है वो अपना ओवल ऑफिस को हमको दे रहे हैं कह रहे हैं की अब अमेरिका में भी "आप" का अलख जगाना है यहाँ पर कोई धरना नहीं देता सभी बिजी हैं किसी को भ्रस्टाचार का ध्यान हीं नहीं, सब झाड़ू तक नहीं रखते, लगाना तो दूर की बात है भ्रस्टाचार का इबोला उन्हें  बहुत परेशान कर रहा है हम ने मन हीं मन में सोचा की नहीं ओवल ऑफिस में चले गए तो अपने देश में का भ्रस्टाचार कैसे ख़तम हो पायेगा एक "आप" हीं तो है जो बचा सकती है देश को, रास्ट्र में न जाने कैसी लहर चल गयी है कोई नहीं जी हम नहीं जायेंगे अमेरिका

पर अभी ये लिखने से पहले हमारे पास यूनाइटेड नेशन से फ़ोन आ गया है की हमको यूनाइटेड नेशन का सचिव बनाया जा रहा है जिनेवा में हमरे लिए सेक्रेटरी जनरल का कुर्सी बान की मून साहब हाथ में धर के खड़े हैं। हमरे कंधो पर विश्व की जिम्मेदारी है हमको अब इस विश्व से भ्रस्टाचारी इबोला को झाड़ू लगाना है

देखिये हम फ़ोन पर बात किये हैं रिकॉर्ड नहीं किये हैं इ सब बात पर हम "आप" का एक ईमानदार सिपाही हैं  इसलिए आपसे कभी कुछ छुपा नहीं सकते, जब से हमने आम आदमी पार्टी ज्वाइन किया है हमारे पास कई ऑफर आ रहे थे पर हम लोग जनता से बिना पूछे कोई काम थोड़े करते हैं।

जैसा की केजरी भैया बोलते हैं की किसी काम करने से पहले जनता से जरुर पूछ लेना, सो हम पूछ रहे हैं, हमको कुमार भैया जैसा गीत गाना नहीं आता है और हम मीडिया में नहीं जाते इसलिए आप सभी से आग्रह है प्लीज हमको इस ब्लॉग पर लिख कर बताइए की हमको क्या करना चाहिए?

सचिव का पोस्ट है ध्यान में रखियेगा
का करें ?चले जाए यूनाइटेड नेशन ?


आपका "आप" का एक सिपाही 
आशुतोष कुमार पाण्डेय 


No comments:

Post a Comment