पिछले दिनों यूँ हीं बैठ कर एक पुरानी मूवी देख रहा था, "पुष्पक" मूवी देखते समय पता चला की मूवी साइलेंट है। कमल हसन ने बतौर अभिनेता बिना बोले हीं फिल्म में जान डाल दी है। फिल्म कॉमेडी से भरपूर है इसमें प्रेम भी है और हास्य भी। मनोरंजन तो भरपूर है इसमें साथ में ये जीवन के लिए सन्देश भी देती है। वर्तमान समाज के स्वार्थ को भी दिखाती है। ये बहुत ही मुश्किल है की बिना गीत और आवाज़ के फिल्म के सभी पहलुओं को दर्शक तक पहुंचा पाना निर्माता और निर्देशक ने बहुत मेहनत की होगी एक अच्छी साइलेंट कॉमेडी फिल्म बनाने में, कॉमेडी ऐसी जिसे आप परिवार के साथ देख सकते हैं, हाल में आज के ज़माने की भी कॉमेडी देखी, आज के फिल्मो का लेवल कितना गिर गया है 'मस्ती', 'क्या सुपर कूल हैं हम' और 'ग्रैंड मस्ती'आज के दौर की वैसी कॉमेडी फिल्म हैं जो मनोरंजन के नाम पर फूहड़ता समाज में परोस रहीं हैं। कहना न होगा की फिल्मो का शुरू से हीं समाज पर प्रभाव रहा है लोग 'शोले' के अमिताभ और धर्मेन्द्र के तरह बाल कटवाते थे और डायलाग बोलते थे बच्चे तो टीवी से ही देख कर व्यवहार सीखते आये हैं। इसमें ताज्जुब की बात नहीं होगी अगर ऐसी फ़िल्में आती रही तो किशोरों के चरित्र में बहुत गलत बदलाव होगा।
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