रुपया गिर रहा है, कल 68.80 का एक डॉलर मिल रहा था, आज 67. रूपये कुछ पैसे में एक डॉलर है। मैंने जब से होश संभाला है तब रुपया को गिरते हुए ही सुनते आया हूँ, जब हम छोटे थे तब 47 रूपये का एक डॉलर था आज 70 छूने वाला है। पहले ये सब उतना समझ में नहीं आता था की क्या है डॉलर में जो हमेशा इससे ही सब कोई कम्पेयर करते रहता है, आज इतना रुपया मिल रहा है एक डॉलर में कल उतना मिल सकता है, अब भी बहुत ज्यादा नहीं समझ में आता है बस इतना समझ में आ रहा है की भारत में मुद्रा का आभाव हो रहा है। बाहर के निवेशक अपना डॉलर निकाल रहे हैं भारत में डॉलर कम हो रहा है। सरकार के मंत्री लोग कह रहे हैं सब ठीक है चिंता की बात नहीं है सरकार के पास बहुत पैसा है। पर जब रूस और बाकि सब देशों की तरफ देखते हैं तो मन में शंका उभर उठती है उनकी मुद्रा इतना क्यों नहीं गिर रही है। महंगाई तो पहले से ही नाच दिखा रही है जब रुपया इतना गिरने लगेगा तो तांडव भी दिखाने लगेगी।
मनमोहन बाबू एक बार तारण हार बन कर आये थे वित्तमंत्री के रूप में 1992 में और आज नियति ने उन्ही के शासन में देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया है।
मुझे इस रुपया के गिरने से खास परेशानी है, अमेरिका जाना था जहाँ पहले ₹36000 लग रहे थे अब ₹42000 लग रहे हैं। ख़्वाब टूट न जाये डर लगता है। पिताजी कांग्रेस के सरकार में मंत्री तो हैं नहीं जो हम खुश रहें.
मनमोहन बाबू एक बार तारण हार बन कर आये थे वित्तमंत्री के रूप में 1992 में और आज नियति ने उन्ही के शासन में देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया है।
मुझे इस रुपया के गिरने से खास परेशानी है, अमेरिका जाना था जहाँ पहले ₹36000 लग रहे थे अब ₹42000 लग रहे हैं। ख़्वाब टूट न जाये डर लगता है। पिताजी कांग्रेस के सरकार में मंत्री तो हैं नहीं जो हम खुश रहें.
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